Kumar Vishwas Shayari
Kumar Vishwas Shayari: कविताओं में हमारे दिलों को छूने की ताकत होती है, और जब बात आधुनिक हिंदी कवियों की आती है, तो डॉ. कुमार विश्वास एक ऐसा नाम है जो सबसे ऊपर आता है। वे सिर्फ़ एक कवि ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। उनके शब्द प्रेम, भावनाओं और सच्चाई से भरे हैं। उनकी शायरी युवा दिलों के साथ-साथ पुरानी पीढ़ी को भी गहराई से छूती है।
आज हम आपके लिए खास तौर पर डॉ. कुमार विश्वास की कुछ चुनिंदा शायरी लेकर आए हैं, जो आपको जरूर पसंद आएंगी।
Kumar Vishwas Shayari

जब भी मुँह ढंक लेता हूँ,
तेरे जुल्फों की छाँव में,
कितने गीत उतर आते हैं,
मेरे मन के गाँव में…!
कोई दीवाना कहता है,
कोई पागल समझाता है,
हर धरती की बेचैनी को बस
बादल समझता है।
इस अधूरी जवानी का क्या फ़ायदा,
बिन कथानक कहानी का क्या फ़ायदा,
जिसमें धुलकर नज़र भी न पावन बनी
आंख में ऐसे पानी का क्या फ़ायदा।
उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे,
वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे.!
जब से मिला है साथ मुझे आप का हुजूर,
सब ख़्वाब ज़िंदगी के हमारे सँवर गए.!
फिर मिरी याद आ रही होगी,
फिर वो दीपक बुझा रही होगी.!
मै तुझसे दूर कैसा हूँ,
तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है,
या मेरा दिल समझता है।
चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की खुशबुएँ,
राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए.!
जिंदगी से लड़ा हूँ तुम्हारे बिना,
हाशिए पर पड़ा हूँ तुम्हारे बिना,
तुम गई छोड़कर, जिस जगह मोड़ पर,
मैं वहीं पर खड़ा हूँ तुम्हारे बिना.!
दिल के तमाम ज़ख़्म तिरी हाँ से भर गए,
जितने कठिन थे रास्ते वो सब गुज़र गए..!
जो किए ही नहीं कभी मैंने,
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं.
मुझसे फिर बात कर रही है वो,
फिर से बातों मे आ रहा हूँ मैं !
कुमार विश्वास शायरी हिंदी
उसी की तरह मुझे सारा जमाना चाहे,
वह मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे।
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,
यह मुसाफिर तो कोई ठिकाना चाहे।
छू गया जब कभी खयाल तेरा,
दिल मेरा देर तक धड़कता रहा।
कल तेरा ज़िक्र छिड़ गया था घर में,
और घर देर तक महकता रहा।
मेरे ख्वाबों मे जो तैरती थी,
अप्सरा तू वही हूबहू है,
एक मैं हूं यहाँ एक तू है…!
शोर के बीच ये मेरी चुप्पी,
सुनके मैं ख़ुद ही चौंक जाता हूँ !
सच तो होता नहीं बर्दाश्त तुम्हें,
झूठ मैं बोल नहीं पाता हूँ…!
मैं ज़माने की ठोकर ही खाता रहूँ,
तुम ज़माने की ठोकर लगाती रही,
जिंदगी के कमल पर गिरुँ ओस-सा,
रोष की धूप बन तुम सुखाती रही.!
प्यार जब जिस्म की चीखों में दफ़न हो जाए,
ओढ़नी इस तरह उलझे कि कफ़न हो जाए,
कोई खामोश है इतना, बहाने भूल आया हूँ,
किसी की इक तरनुम में, तराने भूल आया हूँ,
मेरी अब राह मत तकना कभी ए आसमां वालो,
मैं इक चिड़िया की आँखों में, उड़ाने भूल आया हूँ.!
ख़ुद भी शामिल नहीं सफ़र में,
पर लोग कहते हैं काफिला हूँ,
मैं ऐ मुहब्बत !
तेरी अदालत में एक शिकवा हूँ, एक गिला हूँ मैं |
Kumar Vishwas Shayari Famous
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझाता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,
मै तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
हमारे शेर सुनकर भी जो खामोश इतना है,
खुदा जाने गुरुर ए हुस्र में मदहोश कितना है,
किसी प्याले से पूछा है सुराही ने सबब मय का,
जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है !!
तू अगर खुद पे यक़ीन रखे तो किस्मत भी झुकेगी,
तेरे इरादों की लौ से हर मुश्किल सुलगेगी,
रात चाहे कितनी लंबी हो, सवेरा ज़रूर आएगा,
जो जलता है मेहनत से, वो ही जगमगाएगा !!
हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते,
मगर रस्मे-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते,
जरा कुछ देर तुम उन साहिलों कि चीख सुन भर लो,
जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते !!
रिश्ते तो वो आईना हैं, जो सच दिखा जाते हैं,
कभी आँसू बनके, कभी हँसी दे जाते हैं,
निभाने वाले तो आज भी जान लुटा देते हैं,
बस कुछ लोग मतलब के मौसम में बदल जाते हैं !!
मैं उसका हूँ वो इस एहसास से इनकार करती है,
भरी महफ़िल में भी, रुसवा हर बार करती है,
यकीं है सारी दुनिया को, खफा है हमसे वो लेकिन,
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करती है !!
सालों बीत जाते हैं तिनका तिनका सिमटने में,
तब कहीं जाकर हो पाते हैं घोंसले मयस्सर,
कमियां नहीं पैदा कर पाती दूरियां कभी सीमा,
बस खुदगर्जी की चिंगारी ही हवा दे जाती है अक्सर !!
उसी की तरह मुझे सारा जमाना चाहे,
वह मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे,
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,
यह मुसाफिर तो कोई ठिकाना चाहे !!
आसान नहीं हैं एक औरत
का किरदार निभाना,
एक सफेद चादर हैं और दाग
पानी से भी लग सकता हैं।
दो शब्द तसल्ली के नहीं
मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए
फिरते हैं।