Firaq Gorakhpuri Shayari

sandeep By sandeep February 24, 2026
Firaq Gorakhpuri Shayari

Firaq Gorakhpuri Shayari: उर्दू शायरी की दुनिया में अगर किसी नाम को हमेशा याद किया जाएगा, तो उनमें से एक नाम है — फिराक़ गोरखपुरी। उनका असली नाम था रघुपति सहाय, लेकिन उन्हें दुनिया फिराक़ गोरखपुरी के नाम से जानती है।

उनकी शायरी में इश्क़, जुदाई, दर्द और इंसानियत की गहरी बातें मिलती हैं।

फिराक़ साहब की शायरी में शब्द नहीं, बल्कि दिल की आवाज़ होती है। वे प्यार को सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि ज़िंदगी की सच्चाई मानते थे। उनकी पंक्तियाँ सीधी-सादी होती हैं, लेकिन उनमें छुपे अर्थ दिल को छू जाते हैं।

Firaq Gorakhpuri Shayari

Firaq Gorakhpuri Shayari

खामोश शहर की चीखती रातें,
सब चुप है पर, कहने को है हजार बातें…!

ये माना जिंदगी है चार दिन की,
बहुत होते हैं यारों चार दिन भी।

मुद्दतें गुजरी, तेरी याद भी आई ना हमें,
और हम भूल गये हों तुझे, ऐसा भी नहीं.!

बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं,
तुझे ऐ जिन्दगी, हम दूर से पहचान लेते हैं.!

ये माना जिंदगी है चार दिन की,
बहुत होते हैं यारों चार दिन भी।

सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई,
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ. !

तुम मुखातिब भी हो क़रीब भी हो,
तुम को देखें कि तुम से बात करें.!

मुझ को मारा है हर इक दर्द ओ दवा से पहले,
दी सज़ा इश्क़ ने हर जुर्म-ओ-ख़ता से पहले.!

आँखों में जो बात हो गई है,
इक शरह-ए-हयात हो गई है.!

ये माना जिंदगी है चार दिन की,
बहुत होते हैं यारों चार दिन भी।

कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में,
जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में.!

ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा,
और अगर रोइए तो पानी है.!

इसी खंडर में कहीं कुछ दिए हैं टूटे हुए,
इन्हीं से काम चलाओ बड़ी उदास है रात.!

मौत का भी इलाज हो शायद,
जिंदगी का कोई इलाज नहीं.!

ये माना ज़िंदगी है चार दिन की,
बहुत होते हैं यारो चार दिन भी.!

दिखा तो देती है बेहतर हयात के सपने,
ख़राब हो के भी ये ज़िंदगी ख़राब नहीं.!

फिराक गोरखपुरी शायरी हिंदी में

वो जा भी चुका कब का वो भूल
चुका कब का दिल है,
कि फ़िराक़ अब तक दामन को
छुड़ाए है.!

कुछ ऐसी भी गुजरी हैं तेरे हिज्र में रातें,
दिल दर्द से खाली हो मगर बींद न आए.!

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं.!

आई है कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ,
उफ़ ले गई है मुझ को मोहब्बत कहाँ कहाँ!

आए थे हँसते खेलते मय-खाने में ‘फ़िराक़’
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए.!

सोज़-ओ-गुदाज़ में जब पुख़्तगी,
आ जाती है तो ग़म, ग़म नहीं,
रहता बल्कि एक रुहानी,
संजीदगी में बदल जाता है।

रात भी नींद भी कहानी भी,
हाए क्या चीज़ है जवानी भी.!

जो हंसते-बोलते चुप हो गया हूं,
मुझे ऐ दोस्त कुछ याद आ गया है,
नहीं आती तिरी भी याद बरसों,
तिरा इश्क अब तो हद से बढ़ गया है.!

Firaq Gorakhpuri Best Shayari

अब तो उन की याद भी आती नहीं,
कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ!

हम से क्या हो सका मोहब्बत में,
खैर तुम ने तो बेवफ़ाई की!

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं,
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं ।

रात भी नींद भी कहानी भी,
हाए क्या चीज़ है जवानी भी!

रफ़्ता रफ़्ता गैर अपनी ही नज़र में हो गए,
वाह-री गफलत तुझे अपना समझ बैठे थे हम!

आई है कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ,
उफ़ ले गई है मुझ को मोहब्बत कहाँ कहाँ!

बेखुदी में एक ख़लिश सी भी न हो ऐसा नहीं,
तून आये याद लेकिन मैं तुझे भुला नहीं!

मुद्दतें गुजरी, तेरी याद भी आई ना हमें,
और हम भूल गये हों तुझे, ऐसा भी नहीं!

आए थे हँसते खेलते मय-खाने में ‘फ़िराक़’
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए!

Imran Pratapgarhi Shayari >

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